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शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

शकुंतला देवी की गणितीय दुनिया में आपका स्वागत है

सिनेमा विधा की एक विशेषता है कि यह एक साथ कई बातें कह देती हैं और इसमें सबसे बड़ी भूमिका सशक्त पटकथा की होती है। अनु मेनन निर्देशित और विद्या बालन अभिनीत फिल्म 'शकुंतला देवी' आज रिलीज हुई है। यह फिल्म अंकगणित की विश्वप्रसिद्ध विदूषी शकुंतला देवी की बायोपिक है।

Vidya balan new film

फिल्म में शकुंतला देवी के जीवन से जुड़ी घटनाओं को बचपन से लेकर उनकी प्रसिद्धि तक को दर्शाया गया है। पटकथा नॉनलीनियर कथानक के साथ आगे बढ़ती है इससे सपाट कहानी को दिलचस्प बनाने में मदद मिली है। पेशे से इन्वेस्टमेंट बैंकर और तीन अंग्रेजी उपन्यास लिख चुकीं नयनिका महतानी ने इसकी कथा-पटकथा लिखी है। अपनी पहली पटकथा में ही उन्होंने फिल्मी क्राफ्ट की बुनावट को समझा है। सपाट कथानक में नाटकीयता का ज्वार-भाटा उत्पन्न करना उन्हें बखूबी आता है। पटकथा के ढांचे में चुटीले संवाद कसावट भरते हैं। इस फिल्म के संवाद लिखने वाली इशिता मोइत्रा ने दृश्यें के अनुरूप हास्य से लेकर गंभीर संवाद कलाकारों के हिस्से में प्रदान किया है। विनोदी संवादों के कारण ही शकुंतला का मस्तमौला किरदार खुलकर सामने आता है। साथ ही मां-पत्नी के अलावा एक औरत का औरत होना जैसे गंभीर संवाद पूरी फिल्म के बहुपरतीय होने की शर्त पूरी करने में मदद करते हैं।
Shakuntla film review

अगर फिल्मकार की दृष्टि व्यापक हो, तो वह सामान्य कथानक को भी न केवल रुचिकर ढंग से प्रस्तुत करता है, बल्कि कथानक को बहुत रखिए बनाकर सामान्य अर्थों के मुकाबले कई गहरे संदेश भी छोड़ जाता है। अनु मेनन इस में सफल हुई हैं। फिल्म 'शकुंतला देवी' न सिर्फ मानव कंप्यूटर शकुंतला देवी के जीवन घटनाओं का वर्णन करती है, बल्कि उनके जीवन की आड़ लेकर विवाह संस्था, परिवार संस्था और अभिभावक संस्था पर भी एक विमर्श का मंच तैयार करती है। शकुंतला देवी की बायोपिक से परे जाकर अगर दृष्टिपात करते हैं तो यह इस फिल्म की बड़ी विशेषता प्रतीत होती है।

✍️प्रशांत रंजन

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