भारतीये वायु सेना में स्क्वाड्रन की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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बुधवार, 5 अगस्त 2020

भारतीये वायु सेना में स्क्वाड्रन की संख्या को बढ़ाने की आवश्यकता

भारतीये वायुसेना के पास अभी कुल 31 स्क्वाड्रन जो वर्तमान समय में भारतीये वायु  सेना के आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती है।  "ग्लोबल सिक्योरिटी डॉट आर्गेनाइजेशन "  ये आर्गेनाइजेशन नेशनल, इंटरनेशनल सिक्योरिटी  मुद्दे और  मिलिट्री सिस्टम का विश्लेषण करती है। 

Indian Air Force

इस आर्गेनाइजेशन के आकलन के अनुसार वर्तमान समय में भारत को 42 स्क्वाड्रन कि आवश्यकता है। इसकी सबसे बड़ी  वजह यह है कि सारे स्क्वाड्रन एक समय पे तैयार नहीं रहती। किसी को अपडेट करने का काम चल रहा होता है तो किसी की  मरम्मत का काम चल रहा होता है। एक स्क्वाड्रन में तकरीबन 16 से 18 विमान शामिल किये जाते हैं। अगर  बात सिर्फ पाकिस्तान की हो तो कोई मुश्किल नहीं है। जब बात दोहरे वार की आती है। मतलब पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ युद्ध की तो भारत को 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता होगी। भारत सरकार 200 विमान खरीदने को लेकर हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड(HAL)के साथ करार अब अंतिम चरण में है।इसे जल्द निपटाने की कोशिश की जा रही है। हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड से 83 तेजस भी खरीदे गये हैं।जिसकी कीमत 45000 करोड़ है। भारतीये वायुसेना में अभी 18 तेजस शामिल किये गये हैं।

भारतीये वायु सेना के पास 2022 तक 25 से 26 स्क्वाड्रन रह जाने का अनुमान है।
 क्योंकि मिग-27 रिटायर हो चुकी है। और मिग-21 2022 तक रिटायर हो जाएंगा।इसलिए ये आवश्यक हो गया है।कि भारत अपनी स्क्वाड्रन को बढ़ाने के लिए जो विमान खरीदने की प्रक्रिया है।उसमें तेजी लाए। भारतीये वायुसेना में सात तरह के  फाइटर एयरक्राफ्ट हैं जिनमें तेजस,मिराज 2000,सुखोई Su-30 MKI, मिग-21,जेगुवार और अब राफेल शामिल हो चुका है।भारतीये वायु सेना के फाइटर एयरक्राफ्ट की क्षमता और खासियत। 

1.मिराज 2000 
ये विमान पहली बार 1970 में उड़ान भरा था। ये चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट है। ये सिंगल सीटर वाला फाइटर जेट है। इसे फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने बनाया है।


इसकी लम्बाई 47 फिट है इस का वजन 7500 किलो है। ये 13800 किलो गोला बारूद के वजन के साथ 2336 किलोमीटर प्रतिघन्टा की रफ्तार से उड़ सकता है। ये 125 राउंड गोलियाँ प्रतिमिनट दाग सकता है। और 68 मिली मीटर के 18 रॉकेट प्रतिमिनट दाग सकता है।इसकी कीमत लगभग 230 करोड़ है। इसे 1985 में शामिल किया गया था। इसे कारगिल के युद्ध मे इस्तेमाल किया गया था। और बालाकोट एयर स्ट्राइक में भी इसकी सहायता ली गयी थी।

 2. तेजस
तेजस को भरतीय वायु सेना में 2016 में शामिल किया गया था। इसकी लम्बाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.4 मीटर है। ये लेजर गाइडेड मिसाइल और भारत में निर्मित अस्त्र मिसाइल  से लैस है।


ये 2222 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से उड़ने की काबिलियत रखता है। इसका वजन13500 किलो है। ये एक इंजन वाला काफी हल्का विमान है इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे उड़ाना और विमानों की अपेक्षा आसान है। ये हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार कर सकता है इसका निर्माण हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड(HAL)द्वारा किया गया है। एक लड़ाकू विमान की कीमत 350 करोड़ रुपये है।इसका पहला नाम लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे तेजस नाम दिया।

 3.सुखोई एसयु-30 MKI
सुखोई को भारतीये वायु सेना में शक्तिशाली लड़ाकू विमान माना जाता है। अपग्रेड होने के बाद ये ब्रह्मोस मिसाइल को लॉन्च कर सकता है। पहला सुखोई-30 भारत को 2002 में मिला था।


ये 3000 किलोमीटर तक हमला कर सकता है। ये भारी होने के
वावजूद 2100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। ये दो इंजन वाला और दो सीटर वाला एयरक्राफ्ट है। 8 जून 2006 को एपीजे अब्दुल कलाम ने इस विमान में उड़ान भरी थी। वह देश के पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी।1997 में रूस ने भारत को पहला सुखोई दिया था। इसे रूस के सुखोई कम्पनी बनाती है और भारत मे इसे हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाती है।

 4.मिग-29
यह एक दो सीटर वाला लड़ाकू विमान है। रुस ने इसे 1985 में बनाया था भारतीय वायुसेना में लगभग 70 मिग-29 उपयोग में है।


ये 2445 किलोमीटर प्रतिघंटा के रफ्तार उड़ सकता है।इसकी मारक क्षमता 1430 किलोमीटर है। इसकी सहायता से हवा से हवा, हवा से सतह पर वार किया जा सकता है। यह अपग्रेड होने के बाद और शक्तिशाली हो चुका है। इससे एंटी शिपिंग ऑपरेशन में आसानी होती है। इसमें कॉकपिट और डिजिटल स्क्रीन जैसे तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। यह कारगिल युद्ध मे बहुत बड़ी भूमिका निभा चुका है। इसे रूस के मीकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल बनाती है। रूस ने 2019 में 200 करोड़ में भारत को बेचने का ऑफर दिया था।

5.मिग-21
 इसका निर्माण रूस के मिकोयान एविएशन साइंटिफिक इंडस्ट्रियल करती है। भारत ने इसे 1961में खरीदा और 1964 में वायु सेना में शामिल हुआ। अब तक 60 से ज्यादा देशों ने इसका इस्तेमाल किया इसने 1971 के युद्ध मे महत्वपूर्ण रूप से योगदान दिया।


इस विमान की कीमत  लगभग 16 करोड़ बताई गयी है।अब इसे 2022 तक  रिटायर कर दिया जाएगा और इसकी जगह तेजस लेगा। यह एक सीट और एक इंजन वाला विमान है। इसकी रफ्तार 2230 किलोमीटर प्रतिघंटा है।इसकी लम्बाई 15.76 मीटर और चौड़ाई 5.15 मीटर है।ये 8000 किलो वजन
के साथ उड़ सकता है।ये मिसाइल और बम ले जाने में सक्षम है।

 6.राफेल
  इसे भारत ने कुछ दिन पहले फ्रांस से खरीदा है। ये दो इंजन वाला फाइटर जेट है। यह परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है।इसमें हवा से हवा में मार करने वाले मिटियोर मिसाइल लगा है।


इसमें हवा से जमीन पे वार करने वाला स्कैल्प मिसाइल लगा हुआ है।इसमें माउंटेड डिस्प्ले,रडार वार्निंग रेसिवर्स ,इंफ्रारेड सर्च ट्रेकिंग सिस्टम और 10 घण्टे की फ्लाइट डेटा की रिकॉर्डिंग शामिल हैं।

 7.जगुआर 
 ये कम ऊँचाई पर उड़ने वाला विमान है। इससे जंगी हथियारों   को आसानी से ले जाया जा सकता है। ये जमीन पे हमला कर   सकता है।


इसका उपयोग भारत, फ्रांस, ओमान, ब्रिटेन और नाइजीरिया करता है।इसकी लम्बाई 55.22 फीट चौड़ाई 28.51 फीट इसकी ऊँचाई लगभग 16.04 फीट है। ये 1700 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है। इसका वजन 770 किलो है।ये दो एडिईएन या डीइएफ के गोले के साथ लगभग साढ़े चार हजार किलो हथियार ले जा सकता है। शुरुआत में जो जगुआर भारत को ब्रिटेन से मिले थे। वे परमाणु बम ले जा सकते थे। जिसके कारण अमेरिका ने पूरी कोशिश की थी भारत और ब्रिटेन के डील को रोकने की। इसे 1979 में शामिल किया गया था। इसे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाती है।

   📝 सूर्यकांत शर्मा


 





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