समाज के कई मुद्दों को उठाती है प्रकाश झा की आश्रम - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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शनिवार, 29 अगस्त 2020

समाज के कई मुद्दों को उठाती है प्रकाश झा की आश्रम

 प्रकाश झा एक ऐसे निर्देशक और प्रोड्यूसर रहे हैं जिन्हें सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पे फिल्म बनाने वाले निर्देशकों में से जाना जाता है।  प्रकाश झा ने तमाम समाजिक और राजनीतिक मुद्दों से भरे राजनीति, गंगाजल, सत्याग्रह, आरक्षण जैसे तमाम फिल्मे दी है।कुछ इसी तरह की वेब सीरीज प्रकाश झा फिर लेकर आये हैं आश्रम के रूप में है जो उस तरह के धर्मगुरुओं की है जो मासूम भक्तों की श्रद्धा का गलत फायदा उठाते हैं और उनका शोषण करते हैं। यह वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पे 28 अगस्त को रिलीज हुई है।



इस वेब सीरीज की कहानी कुछ यूं है कि  एक दलित लड़की पम्मी( अदिति पोहनकर) जिसे कुस्ती में गलत डिसिजन देकर उच्च जाति के लड़की को जितवा देते हैं। जिससे उसका मेडल जीतने का सपना टूट जाता है। उसके एक कजिन भाई की बारात जाती है जो बड़े मोहल्ले से होकर गुजरती जिसमें पम्मी और उसके कजिन का पत्रकार दोस्त अक्की(राजीव सिद्धार्थ) के जिद पर उसका कजिन भाई घोड़ी पर चढ़ कर उच्च जाति वाले लोगों के मोहल्ले से गुजरता है। और वहाँ पर लड़ाई हो जाती है जिसमें पम्मी का भाई सत्ती(तुसार पांडे) घायल हो जाता हैं। पम्मी और अक्की पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखवाते हैं। लेकिन थाने का सब इंस्पेक्टर उजागर सिंह( दर्शन कुमार)उसे एफआईआर दर्ज कराने से मना करता है। लेकिन पम्मी नहीं मानती जिसके बाद बड़े मोहल्ले के लोग गुस्सा हो जाते हैं। और सत्ती का इलाज नहीं होने देते। तब एंट्री होती है कासी पुर वाले बाबा निराला (बॉबी देओल) जो मोहल्ले के लोगों को धमकाता है तब जाकर सत्ती का इलाज होता है। पम्मी आश्रम के माहौल और बाबा निराला से प्रभावित होती है और आश्रम में साध्वी बनने का निर्णय  लेती है। उसका भाई भी वहाँ नौकरी करना चाहता है तब वह आश्रम में समाज से प्रताड़ित लड़की (त्रिधा चौधरी) से शादी करता है। उधर जंगल में एक कंपनी के कंस्ट्रक्शन की खुदाई में एक कंकाल मिलता है। जिससे राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष में उथल पुथल शुरू हो जाता है उस कंकाल से बाबा निराला का कनेक्शन होता है। उस कंकाल की पोस्टमार्टम डॉ नताशा(अनुप्रिया गोएंका) करती हैं। वह इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर उजागर पोस्टमार्टम रिपोर्ट बदलने का दवाब डालता है मगर वह रिपोर्ट नहीं बदलती है और उजागर को शर्मिंदा करती है जिससे उजागर उससे आकर्षित होता है वह केस के प्रति ईमानदार हो जाता है। और बाबा निराला उस जांच को रोकने के लिए हर तरह से कोशिश करता है। इस वेब सीरीज में सिर्फ धरगुरुओं के पाखंडता को नहीं दिखाया गया है बल्कि इसमें पॉलिटिक्स की भूमिका और दलित उत्पीड़न मामले को भी दिखाया गया है।


रिव्यु

बॉबी देओल का किरदार जिस क्रूरता भरे बाबा की है। वो क्रूरता उनके अभिनय में नहीं झलकता उनके लुक को थोड़ा और वृद्ध किया जा सकता था। वैसे बॉबी कुछ सीन में निखर कर सामने आते हैं। दर्शन कुमार की अभिनय जानदार रही है। डॉक्टर के किरदार में अनुप्रिया गोएंका भी सहज दिखती हैं। तुसार पांडेय और त्रिधा चौधरी भी आकर्षक का केंद्र रहती हैं। चंदन रॉय ने भोपा के किरदार को खूबसूरत अंदाज में पेश किया है। प्रकाश झा की तारीफ करनी होगी शूटिंग लोकेशन काफी जानदार चुनी गई है। इस वेब सीरीज  की  शूटिंग उतर प्रदेश में  की गई है। इस सीरीज में  दिखाए गए जगह बिल्कुल वास्तविक लगती जिसे देखने के बाद  दर्शक अपने गांव की दृश्य का अनुभव कर सकते हैं जो कहानी को भरपूर पकड़ देती है। लेकिन कहानी में खिंचाव है इसे थोड़ा छोटा किया जा सकता था। लेकिन  फिर भी  ये उबने नहीं देती है। ऐसा महसूस होता है कि इस वेब सीरीज  को इसके भाग 2 के  परिचय के रूप में बनाया गया है। जिसके वजह से यह थोड़ा खाली-खाली लगता है।

✍️ सूर्याकांत शर्मा

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