सिर्फ एक्शन के दम पर बोलती फिल्म खुदा हाफिज - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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शनिवार, 15 अगस्त 2020

सिर्फ एक्शन के दम पर बोलती फिल्म खुदा हाफिज

 फारुक कबीर की फिल्म खुदा हाफ़िज 14 अगस्त को डिजिटल प्लेटफॉर्म हॉटस्टार पे रिलीज किया गया है। इस फिल्म की भी कहानी अखबार के खबर से प्रेरित होकर बनाया गया है। इससे पहले भी फारुक कबीर ने फिल्म अल्लाह के बन्दे को अखबार से प्रेरित होकर बनाया था।


Khuda Hafiz movie


इस फिल्म की कहानी लखनऊ की दो कपल नरगिस चौधरी(शीवालिका ओबेरॉय) और समीर चौधरी(विधुत जामवाल) के इर्द-गिर्द घूमती है। होता कुछ यूँ है कि 2008 की आर्थिक मंदी में काफी लोगों की नौकरियां चली जाती है।उसमें समीर और नरगिस भी शामिल रहते हैं। तभी उन्हें अरब एजेंट हमीद(विपिन शर्मा) से नोमान नाम के अरब देश में नौकरी के बारे में पता चलता है। लेकिन सबसे पहले बुलावा नरगिस को आता है। लेकिन समीर उसे अकेले जाने देने को लेकर सहज नहीं रहता है। मगर नरगिस के समझाने के बाद वो तैयार हो जाता है। लेकिन कुछ दिन बाद उसे नरगिस का कॉल आता है। जिसमें वो बहुत परेशान रहती है। जिसमे बाद वो नोमान पहुँचता है। वहाँ जा कर उसे पता चलता है। कि नरगिस से जबर्दस्ती जिस्मफरोशी का धंधा करवाया जाता है तब वो अकेले ही उन लोगों को खत्म करने की कोशिश करता है। उसकी मदद करते हैं उस्मान अली मुराद(अनु कपूर),फैज अबु मलिक(शिव पंडित) और तमेना हामिद उसकी मदद करते हैं।अब ये देखना रोचक होगा कि क्या समीर नरगिस को बचा पाएगा?

 फिल्म रिव्यु

इस फिल्म को देखने के बाद याद आती है इसी साल रिलीज हुई फिल्म बागी 3 जिसमें भी कुछ इसी तरह का घटना घटती है। फिल्म में फ़िल्म में विधुत जामवाल की एक्शन की तारीफ करनी होगी। उनके एक्शन सीन काफी शानदार रहे हैं।लेकिन भावनात्मक जुड़ाव का वास्ता दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आता उनके इमोशन जैसे एक्शन में कहीं छिप से गये हैं। शीवालिका ओबेरॉय की जगह कुछ ज्यादा नहीं रही है। इस फिल्म में उन्हें डायलॉग भी बहुत कम मिले हैं। ऐसा लगता है जैसे स्क्रिप्ट में बस उनको एक मौन की भांति गढ़ा गया है। उनके अंदर परेशानी से निकलने की उत्तेजना नजर नहीं आती है। वैसे वह अपनी खूबसूरती की छाप छोड़ती हैं। अन्नु मलिक का अभिनय आकर्षक रहता है। वह जब भी आते हैं अपने उस्मान अली मुराद के किरदार को बखूबी निभाते हुए नजर आते हैं। शिव पंडित और अहाना कुमरा भी ठीक-ठाक रहे हैं। फिल्म में हिंदी, अरबी और कहीं-कहीं अंग्रेजी डायलॉग शामिल हैं। फिल्म की शूटिंग उज्बेकिस्तान में हुई है। निर्देशन के क्षेत्र में फारुक कबीर सही रहे हैं। पटकथा सामान्य रही है कुछ नयापन नजर नहीं आया है ऐसा लग रहा है जैसे फारुक कबीर और ज़हीर अब्बास कुरैशी सारा फोकस सिर्फ एक्शन पे किया हो। अगर आप एक्शन फिल्मों के शौकीन हैं या विधुत जामवाल के फैन हैं। तो ये मूवी आपके लिए है।
✍🏻 सूर्याकांत शर्मा

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