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रविवार, 9 अगस्त 2020

दुनिया के कुछ धार्मिक स्थल जिन्हें ले कर चल रहा है विवाद

 विश्व में कई ऐसे धार्मिक स्थल है जिन्हें लेकर विवाद जारी है। जिन्हें काफी सुलझाने की कोशिश की गई मगर वो नहीं सुलझे।आइये कुछ विवादित स्थलों को देखते हैं।


1. प्रीह विहेयर (कंबोडिया)                                                प्रिह विहेयर मन्दिर जो कंबोडिया में स्थित है। कहा जाता है कि हिंदू शासक सूर्यवर्मन ने 11वीं शताब्दी में इस मंदिर को बनवाया था। जिसमें भगवान शिव की पूजा होती थी। लेकिन 13वीं शताब्दी में यहाँ बौद्ध धर्म के लोगों ने कब्जा कर लिया। अब कंबोडिया और थाईलैंड दोनों इस पर अपना हक जताते हैं।


Prih viheyr temple Cambodia

2008 में एक अंतराष्ट्रीय अदालत ने इस मंदिर पर कंबोडिया के हक में फैसला सुनाया था। इससे थाईलैंड काफी नाराज हुआ। यहाँ तक कि दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष भी हुए और आज तक यह विवाद नहीं सुलझ पाया है।

 2. उलुरु (ऑस्ट्रेलिया)                                                     यह विश्व का सबसे विशाल चट्टान है यह 300 लाख साल पुराना है। यह वहाँ के आदिवासियों के लिए यह एक पवित्र जगह है। 




यहाँ अब भी दो आदिवासी समुदायों के बीच इसे लेकर विवाद और संघर्ष जारी है। दो समूहों ने इसे बराबर बंटवारे करके समझौता करने की कोशिश की लेकिन ये नहीं हो पाया। इस पर पहले पर्यटकों की काफी भीड़ होती थी चढाई करने के लिये। लेकिन अब चढ़ाई पे रोक लगा दी गई है।              

3.पोटाला पैलेस [ल्हासा (तिब्बत)]
पोटाला पैलेस ल्हासा तिब्बत में स्थित है। इसे दुनिया का सबसे ऊंचा प्राचीन महल होने का सम्मान प्राप्त है।यह समुद्र तल से 3750 मीटर (12300 फिट) उपर है। ये ल्हासा शहर से 100 मीटर(300 फीट) उपर है।


इस 13 मंजिले ऊंचे महल में 1000 से अधिक कमरें हैं ये लगभग 32 एकड़ में फैला है। इसकी पत्थर की दीवारें औसतन 3 मीटर मोटी है। इसे बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। दलाई लामा भी पहले यहाँ रहा करते थे। लेकिन 1959 में जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया तो दलाई लामा को वहाँ से जाना पड़ा। फिर चीन ने इसे संग्रहालय में तब्दील कर दिया। और चीनी सरकार ने इसे पर्यटन स्थल घोषित किया। इसे लेकर तिब्बती बौद्ध धर्म के लोगों और चीन कि सरकार में युद्ध होती रहती है। 1994 में इसे विश्व सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया।

  4.यासुकुनी (जापान)
यह स्थल 1869 में निर्मित टोक्यो में स्थित है। यह एक तीर्थ स्थल है। इसे शोगुन युद्धों में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनवाया गया था। यहां नानजिंग नरसंहार के अध्यक्षता करने वाले सैन्य कमांडर और पर्ल हार्बर पे हमला करने का आदेश देने वाले प्रधानमंत्री हिदेकी तोजो का कब्र है। यह वही युद्ध है।

Yasukuni Japan

जब जपानी सैनिको द्वारा नानजिंग शहर को कब्जे में लेकर हत्या, लूट और रेप  जैसे घटना को अंजाम दिया था। जिसके कारण जब भी जपान प्रधानमंत्री इस स्थल पे अपने सैनिकों को श्रद्धांजलि देने जाते हैं। तब जपान के सम्बंध चीन और दक्षिण कोरिया से बिगड़ जाते हैं।

5.पश्चिमी दीवार (येरुशलम)
यह दीवार यरुशलम में माउंट टेम्पल के पास स्थित है। माना जाता है कि यहाँ पर पहले एक मंदिर था यह दीवार उसी मन्दिर का हिस्सा है। यहाँ पर दुनिया भर के यहूदी आते हैं और प्रार्थना करते हैं। उनका मानना है की जिस पे दुनिया का निर्माण हुआ है उस शिला की नीव यहीं पर सबसे पहले रखी गई है। 


West wall jeruslam


जहाँ अब्राहम ने अपने बेटे इसाक की कुर्बानी दी।लेकिन 1967 में इजरायल ने इस पर हमला कर नियंत्रण हाँसिल कर लिया। सुनी मुसलमानों के अक्सा मस्जिद के बगल में इसकी जगह होने से दोनों में विवाद होता रहता है। यरुशलम में 2011 जनगणना के अनुसार यहाँ यहूदियों की संख्या ज्यादा है उनकी संख्या 497000   (62%) है। मुस्लिमों की 281000 (35%) और ईसाइयों की 14000(2%) है।

6.द चर्च ऑफ द होली सिपुलचर (येरूसलम)                     चौथी शताब्दी में सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने ईसाई धर्म अपनाने के बाद इसका निर्माण शुरू हुआ। और इसकी देखरेख उन्होंने ने अपनी माँ से करने को कहा। सम्राट कॉन्सटेंटाइन ने इतिहासकार आर्मस्ट्रांग को प्राचीन वस्तुओं की खोज के लिए खुदाई करने को कहा। वह यीशु की कब्र खोज रहे थे। 



येरूसलम ईसाइयों, यहूदियों और मुस्लिमों का पवित्र शहर है। ईसाइयों का मानना है कि यहाँ जीसस को सूली पे चढ़ाया गया था और उनका फिर पूर्ण जन्म हुआ। इसलिये यहाँ दुनियाँ भर से ईसाई आते हैं। 1009 में एक मुस्लिम खलीफा ने इस चर्च को खत्म कर दिया था। लेकिन इसका फिर से निर्माण हुआ। लेकिन अभी भी इसे लेकर कुछ पक्षों में विवाद है। इसे "द प्लेस ऑफ स्कल" के नाम से भी जाना जाता है।

 📝सूर्याकांत शर्मा

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