हस्त नक्षत्र व साध्य योग के पुण्य संयोग में गणेश चतुर्थी, संतान के दीर्घायु के लिए चउरचन व्रत भी शनिवार को ही - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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शनिवार, 22 अगस्त 2020

हस्त नक्षत्र व साध्य योग के पुण्य संयोग में गणेश चतुर्थी, संतान के दीर्घायु के लिए चउरचन व्रत भी शनिवार को ही

 सिद्धि विनायक की उपासना से हर काम सिद्ध हो जाता है I श्री गणेश जीवन की विघ्न-बाधाओं को दूर कर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते है I इसीलिए उन्हें सभी देवो में अधिक महत्व दिया गया है I भगवान गणेश की उपासना से जहां कार्यो में सफलता मिलती है, वहीं तमाम अवरोध हटते है और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है I यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी तिथि से अनंत चतुर्दशी तक यानि पुरे 10 दिनों तक हर्षो-उल्लास के साथ मनाया जाता है I 


Ganesh chaturthi 2020


चतुर्थी से चतुर्दशी तक पूजेंगे गणपति


ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया कि गणेश चतुर्थी का दस दिवसीय महापर्व शनिवार को हस्त नक्षत्र से युक्त साध्य योग में शुरू होकर अनंत चतुर्दशी यानि 1 सितंबर दिन मंगलवार को धनिष्ठा नक्षत्र तक मनाया जायेगा I ज्योतिष शास्त्र के अनुसार काम सिद्धि के लिए गणेश की उपासना आवश्यक है I इस पर्व के अवसर पर गणेश की उपासना से हर कार्य सिद्ध हो सकते है I इस पुण्यप्रद योग में गणपति की आराधना से विद्या-बुद्धि, सिद्धि, समृद्धि, शक्ति एवं सम्मान में वृद्धि होगी I


भाद्रपद मास का प्रमुख पर्व


पंडित झा ने कहा गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास की चतुर्थी से चतुर्दशी तक यानि पुरे 10 दिनों तक चलती है I वैनायकी सिद्धि विनायक गणेश चतुर्थी कल मनाई जाएगी लेकिन उपासना इससे आगे 10 दिनों तक चलेगी I भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है I इनकी उपासना के लिए भाद्रपद का ये महीना काफी शुभ फलदायी होता है I


संतान की दीर्घायु के लिए चौथचंद्र (चउरचन) व्रत भी आज


पंडित झा ने कहा कि बिहार में खासकर मिथिलांचल के प्रसिद्ध त्योहार चौथचंद्र (चउरचन) व्रत कल रवियोग में मनाया जाएगा I श्रद्धालु संतान के दीर्घायु, आरोग्य एवं निष्कलंक के लिए ऋतूफल, दही तथा पकवान हाथ में लेकर चंद्र दर्शन करते है I इस दिन चन्द्रमा के पूजन एवं अर्घ्य देने से मनोविकार से मुक्ति, आरोग्यता, ऐश्वर्य, संतान के दीर्घायु होने का वरदान मिलता है I इसी दिन गणेश भगवान ने चन्द्रमा को श्रापमुक्त करके शीतलता एवं सौंदर्य का वरदान दिए थे.       


चन्द्र दर्शन दोष से बचाव


सनातन धर्मावलंबी राष्ट्रीय पंडित राकेश झा शास्त्री ने बताया भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि कल रात में चंद्रदर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है I जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते है उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है I ऐसा शास्त्रों का निर्देश व अनुभूत है I धार्मिक ग्रन्थों के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण को इस दिन चंद्र दर्शन से स्यमंतक मणि चोरी का मिथ्या आरोप लगा था I फिर नारद मुनि के बताने पर उन्होंने गणेश चतुर्थी का व्रत कर इस दोष से मुक्त हुए थे I


गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा 


इस पर्व को लेकर प्राचीन कथा प्रचलित है I कथा के अनुसार शिव ने क्रोध में गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया था I इसके बाद पार्वती के नाराज होने पर उन्होंने गणेश को नया रूप दिया I  बाद में गणेश प्रथम पूज्य देवता बने I शास्त्रों में गणेश की उपासना के कई विधान और शुभ फलदायक बताया गया है I गणपति की पूजा- अर्चना से हर काम पूरा होता है तथा भादो माह में उनकी पूरे देश में उपासना धूमधाम से की जाती है I


पूजन का शुभ मुहूर्त


पंडित झा ने बताया कि सिद्धि विनायक गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसीलिए इसी काल में पूजा करना शुभ माना जाता है। 

  • पूजा का शुभ मुहूर्त:

 प्रात: 05:37 बजे से पुरे दिन


  • अभिजीत मुहूर्त :-

 दोपहर 11:26 बजे से 12:18 बजे तक


  • गुली काल मुहूर्त :- 

सुबह 05:27 बजे से 07:03 बजे तक


न्यूज़ डेस्क

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