जानें प्रेगनेंसी के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल का महत्व, माँ और बच्चें दोनों के लिए जरूरी - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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मंगलवार, 25 अगस्त 2020

जानें प्रेगनेंसी के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल का महत्व, माँ और बच्चें दोनों के लिए जरूरी

 गर्भावस्था के सफ़र में प्रसव से पहले माँ और शिशु की देखभाल बहुत ही आवश्यक होता है। प्रसव से पहले माँ और बच्चे की देखभाल स्वस्थ रखने में मदद करती है। आपके डॉक्टर प्रसव से पहले गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे के विकास पर पूरी निगरानी रखते हैं, और भविष्य में होने वाली संभावित समस्याओं का पता लगाते हैं और उसे रोकने के लिए नियमित जाँच भी करते हैं। 


प्रसवपूर्व देखभाल


प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पहली अपॉइंटमेंट

जब आपको पता हो है की आप प्रेग्नेंट हैं, तब आप प्रसव से पहले की देखभाल शुरू कर सकती हैं। महिलाये प्रेग्नेंट होने से पहले ही डॉक्टर से सलाह ले सकती हैं। यदि गर्भावस्था की योजना से पहले डॉक्टर के संपर्क  में रहना संभव नहीं हो, तो पहली बार मासिक धर्म बंद होने पर ही जल्दी ही डॉक्टर से संपर्क करें और प्रसव से पहले अपॉइंटमेंट लेना शुरू करे।

प्रसव से पूर्व देखभाल के लिए पहली बार चिकित्सक से मिलने पर क्या होता हैं

  • डॉक्टर आपसे पूछ सकते है कि आप विटामिन सेवन करती है या नहीं चिकित्सक आप से आपके प्रतिदिन के भोजन और जीवनशैली के बारे में भी पूछ सकते हैं

  • डॉक्टर आपसे आपकी मेडिकल के बारे में पूछ सकते हैं जैसे कोई बीमारी, ऑपरेशन आदि

  • डॉक्टर प्रिलिमिनरी जाँच के लिए आपके ब्लड व यूरिन का सैंपल ले सकते हैं

  • आपके ब्लड प्रेशर, लंबाई, पल्स रेट और वज़न को नोट कर सकते हैं

  • आप गर्भावस्था के दौरान कौन-सी दवाइयाँ ले रही हो इस के बारे में पूछ सकते हैं

  • चिकित्सक आपके ड्यू डेट का आकलन कर सकते हैं

इन जानकारियों के द्वारा डॉक्टर आपको किसी भी बदलाव के बारे में सलाह दे सकते हैं, जिससे आपकी गर्भावस्था सुरक्षित रहे। गर्भावस्था के दौरान किसी भी नई चीज के सेवन या इस्तेमाल से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह ले। इस दौरान वे  आपके कुछ टेस्ट भी कर सकते हैं या करवाने की सलाह दे सकते हैं। 

 

प्रसव के पहले होने वाले परीक्षण 

प्रसव के पहले उपचार की विभिन्न प्रक्रियाएं होती हैं, जो यह निश्चित करती हैं, कि माँ और गर्भ में पल रहा भ्रूण स्वस्थ है या नहीं। कुछ टेस्ट के माध्यम से जन्म के संभावित दोषों का भी पता लगया जा सकता है। गर्भावस्था के समय प्रसव के पहले टेस्ट करना बहुत ही ज़रूरी होता है। आपके डॉक्टर आपको आपके प्रेगेंसी के निश्चित समय पहले परीक्षण का सुझाव दे सकते हैं, ताकि यह निश्चित किया जा सके कि आप स्वस्थ हैं या नहीं, और आपके गर्भ में पल रहा भ्रूण सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं। डॉक्टर आपकी उम्र और अन्य होने वाले जोखिम के कारकों के आधार पर आपको विशिष्ट परीक्षणों की भी सलाह दे सकते हैं। कई महिलाओं में कुछ समस्याएँ और जन्म दोषों का जोखिम होने का खतरा बहुत  अधिक होता है, डॉक्टर महिला को उसकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर सलाह देगे कि महिला के लिए कौन-सा परीक्षण सही हो सकता है।


प्रसव के पहले अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड डॉक्टर को यह पता लगाने में सहायता करता है, कि क्या भ्रूण सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं। गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय पर अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट के माध्यम से डॉक्टर समस्या का पता लगाकर कई जाँच या अन्य अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दे सकते हैं।

प्रसव के पहले देखभाल के समय अल्ट्रासाउंड का महत्व :

  • अल्ट्रासाउंड की सहायता से प्रसव की निश्चित तारीख का पता लगाया जा सकता है।

  • अल्ट्रासाउंड से गर्भनाल की स्थिति, भ्रूण का आकार,  भ्रूण स्थिति,  भ्रूण की गति का पता लगाया जा सकता है।

  • एक से अधिक गर्भधारण का पता लगाया जा सकता है।

  • अल्ट्रासाउंड से डाउन सिंड्रोम का भी पता लगाया जाता सकता है।

 

गर्भावस्था के शुरुआती लक्षण और पहचान:-

मां बनना हर महिला चाहती है और उसके लिए यह अनोखा एहसास होता है। गर्भधारण के बाद से लेकर बच्चे के जन्म के दौरान तक माँ में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव महशुस हैं। महिलाओ को गर्भाशय में ऐठन, मासिक धर्म बंद होना, अधिक थकान तथा स्तनों मे बदलाव आदि संकेत शामिल होते  हैं।

 

गर्भवती होने की पुष्टि के बाद होने वाले शारीरिक व मानसिक बदलाव 

यदि आपका मासिक धर्म हमेशा की तरह नहीं हो रहा है और आप प्रेगनेंसी टेस्ट या डॉक्टर से चेकअप करा कर इस बात की जानकारी प्राप्त कर सकती है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं, यदि आप प्रेग्नेंट है तो आपके शरीर में कई बदलाव आ सकते हैं जैसे: 

स्तनों में बदलाव:

गर्भवती होने पर आपके स्तनों का आकार बड़ा हो सकता है, आपके स्तन कोमल हो सकते हैं और स्तनों मे कई बार दर्द भी महसूस हो सकता है। यह सब शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है

पेट फूलना:

शरीर में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की मात्रा बढ़ जाने पर पाचन शक्ति कम हो जाती है जिसके कारण पेट हमेशा भारी और भरा हुआ महसूस होता है।

चेहरे पर चमक:


हॉर्मोन के बढ़ने पर शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है और त्वचा में तेल की मात्रा भी बढ़ जाती है जिसके कारण त्वचा पर चमक भी आने लगती है।

दिल की धड़कन बढ़ना:

महिलाओ के शरीर को गर्भ में पल रहें बच्चे की ऑक्सीजन और अन्य तत्वों की मांग को पूरा करना होता है जिसके लिए दिल अधिक काम करता है ,जिसके चलते दिल की धड़कन बढ़ जाती है। गर्भधारण के शुरुवात में महिलाओं के कमर के नीचे के हिस्से में दर्द की समस्या उत्पन्न होती है।

 

प्रसवपूर्व देखभाल के लिए सबसे अच्छे हॉस्पिटल का चयन करते वक़्त क्या रखें ध्यान?


प्रसवपूर्व देखरेख के लिए हॉस्पिटल बहुत सारे मौजूद हैं, ऐसे में आपको सही हॉस्पिटल के चयन के दौरान बहुत सावधानी रखनी चाहिए। सबसे पहले ध्यान दें कि आपके द्वारा चुने गए हॉस्पिटल की प्रतिष्ठा अच्छी हो। इसके अलावा यह भी ध्यान दें कि अस्पताल में स्टाफ सपोर्ट की सुविधा उपलब्ध है या नहीं जैसे न्यूट्रिशनिस्ट, डाइटीशियन, योगा ट्रेनर्स साथ ही यह भी सुनिश्चित करें अस्पताल में इमरजेंसी यूनिट की सुविधा हो, ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में आपको किसी परेशानी ना हो।

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