कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र आज से शुरू, अश्व पर आगमन व महिष पर होगी विदाई - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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शनिवार, 17 अक्तूबर 2020

कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र आज से शुरू, अश्व पर आगमन व महिष पर होगी विदाई

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आज आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से हो रही है I इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण जहां सार्वजनिक रूप से पंडाल पूजा की मनाही है, वहीं माता के उपासक सावधानी बरतते हुए अपने घरों में ही देवी की पूजा-आराधना करेंगे I इस बार किसी भी तिथि की क्षय नहीं होने से पुरे दस दिनों तक माता अम्बे की पूजा होगी । नवरात्रि के दसवें दिन विजयदशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि को सभी नवरात्रों में सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण माना जाता है। आज आश्चिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से विजया दशमी तक माता के विभिन्न रूपों की आराधना होगी I


Navratri 2020


अश्व पर आगमन व महिष पर होगी विदाई              

भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद् के सदस्य ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि 17 अक्टूबर प्रतिपदा दिन शनिवार को अभिजीत मुहूर्त व सर्वार्थ सिद्धि योग में कलश स्थापना से आरंभ होकर शारदीय नवरात्र  26 अक्टूबर दिन सोमवार को रवियोग में विजया दशमी के साथ संपन्न होगा I इस नवरात्र में माता अपनों भक्तो को दर्शन देने के लिए घोड़ा पर आ रही है I माता के इस आगमन से श्रद्धालुओं को उनके जीवन में अश्व की गति की तरह तरक्की मिलेगी I शासन, सत्ता में उल्ट-फेर तथा पड़ोसी देशों से मनमुटाव की स्थिति बनेगी I  इसके साथ ही माता की विदाई महिष पर  होगी I माता इस गमन से  भारतवर्ष में आने वाले साल में रोग, शोक, बेरोजगारी में वृद्धि के आसार है  I श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना कर माता का आवाहन के साथ दुर्गा सप्तशती, दुर्गा सहस्त्र नाम, रामचरितमानस, सुंदरकांड, अर्गला, कवच, कील आदि का पाठ करेंगे I  


शारदीय नवरात्र में बना अद्भुत संयोग


इस बार आज से शुरू हो रहे नवरात्र में ग्रह-गोचरों की शुभ स्थिति से उत्तम संयोग बन रहा है। नवरात्रि पर राजयोग, द्विपुष्कर योग, सिद्धियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धियोग और अमृत योग जैसे अद्भुत व उत्तमोत्तम शुभ  संयोग बन रहे है । इसमें 17, 19, 23 व 24 अक्टूबर को चार सर्वार्थसिद्धि योग बन रहे हैं I 18 व 24 अक्टूबर को सिद्धि महायोग, 17, 21 व 25 अक्टूबर को अमृत योग बनेंगे I वहीं सूर्य व बुध की युति से 18 अक्टूबर को बुधादित्य योग, 19 को आयुषमान, 20 को सौभाग्य योग व 21 अक्टूबर को ललिता पंचमी का शुभ दिन है I इसीलिए इस बार नवरात्रि में दुर्गा सप्तसती, रामचरित मानस, कवच, अर्गला, कील का पाठ करने से देवी प्रसन्न होंगी और सुख-समृद्धि, मनोकामना पूर्ति, स्वास्थ्य लाभ, पारिवारिक सौहार्द एवं ऐश्वर्य का वरदान प्रदान करेंगी ।


कलश स्थापना से मिलेगा  सुख-समृद्धि 


पंडित झा ने देवी पुराण के हवाले से कहा कि  नवरात्र व्रत-पूजा में कलश स्थापन का विशेष महत्व है I  कलश में  ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, नवग्रहों, सभी नदियों, सागरों-सरोवरों, सातों द्वीपों, षोडश मातृकाओं, चौसठ योगिनियों सहित सभी तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है I  धर्मशास्त्र में अनुसार नवरात्र में कलश की पूजा करने से सुख- समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्य, शांति, पारिवारिक उन्नति तथा रोग-शोक का नाश होता है I कलश स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को अभिजीत मुहूर्त के करना श्रेयस्कर होगा I 


मां दुर्गा के नौ रूपों की होगी पूजा


नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना होती है। पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, चौथे दिन मां कुष्मांडा, पांचवें दिन मां स्कंदमाता, छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें और अंतिम दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना  कर भगवती की विधिवत पूजा की जाती है ।


माता की आराधना से मिलेगी मनचाहा वरदान


छात्र इस नवरात्र में  'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः' मंत्र का जाप करके प्रतियोगिता में सफल हो सकते है। कर्ज से मुक्ति के लिए “या देवि ! सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः”का जप करके ऋण मुक्त  हो सकते है । जिन युवकों का विवाह न हो रहा हो वे  "पत्नी मनोरमां देहि ! मनो वृत्तानु सारिणीम तारिणीम दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम" का जप करके मनोनुकूल जीवन साथी पा सकते हैं I कुंवारी कन्यायें जिनका विवाह न हो रहा हो वे "ॐ कात्यायनि महामाये !महायोगिन्यधीश्वरी ! नन्द गोप सुतं देवि ! पतिं मे कुरु ते नमः" मंत्र का जप करके ईष्ट जीवनसाथी पा सकती हैं।


कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त


  • उदयकालिक योग: प्रातः 06:17 बजे से शाम 05:43 बजे तक            
  • अभिजीत मुहूर्त:- दोपहर 11:36 बजे से 12:24 बजे तक                                     
  • गुली काल मुहूर्त:- प्रातः 05:50 बजे से 07: 16 बजे तक  


राशि के अनुसार करें मां की आराधना


  • मेष : रक्त चंदन, लाल पुष्प और सफेद मिष्ठान्न अर्पण करें।
  • वृष : पंचमेवा, सुपाड़ी, सफेद चंदन, पुष्प चढ़ाएं।
  • मिथुन : केला, पुष्प, धूप से पूजा करें।
  • कर्क : बताशा, चावल, दही का अर्पण करें।
  • सिंह : तांबे के पात्र में रोली, चंदन, केसर, कर्पूर के साथ आरती करें।
  • कन्या : फल, पान पत्ता, गंगाजल मां को अर्पित करें।
  • तुला : दूध, चावल, चुनरी चढ़ाएं और घी के दीपक से आरती करें।
  • वृश्चिक : लाल फूल, गुड़, चावल और चंदन के साथ पूजा करें।
  • धनु : हल्दी, केसर, तिल का तेल, पीत पुष्प अर्पित करें।

  • मकर : सरसों तेल का दीया, पुष्प, चावल, कुमकुम और हलवा मां को अर्पण करें।
  • कुंभ : पुष्प, कुमकुम, तेल का दीपक और फल अर्पित करें।
  • मीन : हल्दी, चावल, पीले फूल और केले के साथ पूजन करें।

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