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शनिवार, 10 अक्तूबर 2020

फिल्म रिव्यु: ईगो और कंफ्यूजन के बीच दबी सी लगती है फिल्म 'गिन्नी वेड्स सनी'

पुनीत खन्ना के द्वारा निर्देशित फिल्म गिन्नी वेड्स सनी नेटफ्लिक्स पे स्ट्रीम हो रही है। ये फिल्म दिल्ली और पंजाबी इश्क़ के लहजे में प्रस्तुत की गई है। इस तरह के कॉन्सेप्ट का हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री से गहरा नाता रहा है। जिसमें हीरो हीरोइन को मनाने की या हीरोइन हीरो को मनाने की कोशिश करते है। जिसमें वही पुराने नखरे दोनों को मिलाने के लिए मम्मी-पापा  की एंट्री इस फिल्म के निर्माता विनोद बच्चन है जिन्होंने इससे पहले भी तनु वेड्स मनु, शादी में जरूर आना जैसी फिल्में बनाई हैं।



फिल्म की कहानी है सनी सेठी (विक्रांत मैसी) की जो एक रेस्ट्रॉन्ट खोलना चाहता है। और एक अच्छी लड़की से शादी करना चाहता है। लेकिन उसकी शादी कहीं नहीं हो पाती है। उसके पिता पप्पी सेठी (राजीव गुप्ता) ये बात शोभा (आयशा रजा मिश्रा) को बताते हैं। वह अपनी बेटी गिन्नी (यामी गौतम) से सनी को मिलने को कहती हैं और उसे इम्प्रेस करने के कई तरीके बताती हैं। लेकिन गिन्नी निशांत राठी(सुहैल नैयर) के साथ रिलेशन में होती है और दोनों अपनी लाइफ में शादी को लेकर कंफ्यूज रहते हैं। उन दोनों के बीच पिसा रहा होता है सनी सेठी।  सनी गिन्नी को बचपन से चाहता है लेकीन वो अपने आपको उसके काबिल नहीं समझता है। क्या सनी को गिन्नी मिलेगी? ये तो फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।


रिव्यु

फिल्म की पटकथा में खिंचाव नजर आता है। ऐसा लगता है कि फिल्म का सेंटर कनफ्लिक्ट कंफ्यूजन ही है। जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी गढ़ी गई है। कहानी में कुछ खास नहीं है जो आपको नया लगे। सुमित अरोरा और नवजोत गुलाटी को अगर थोड़ा मोड़ा क्रेडिट मिलता भी है तो वो कुछ संवाद के लिए जो थोड़ा गुदगुदाने का काम करते हैं लेकिन इसकी भी संख्या कुछ ही है। बात अभिनय की करे तो विक्रांत मैसी ने अच्छी कोशिश की है पंजाबी आशिक में ढलने की यामी गौतम भी सुंदर लगी हैं और अपने  बोल्ड और कड़े रुख वाले किरदार को पर्दे पे काफी हद तक खुलकर उतारती नजर आई हैं। सहयोगी कलाकारों में आयशा रजा मिश्रा, सुहैल नैयर और राजीव गुप्ता ने भी प्रभावित किया है। फिल्म डायरेक्शन भी सधी है वही दिल्ली की कनॉट प्लेस और इंडिया गेट की लोकेशन आपको देखने को मिलेंगे। पुनीत खन्ना के लिए कुछ ऐसा था ही नहीं जो वो अपना कुछ अलग एफर्ट लगा पाएं फिल्म बस पूरी कर ली गई है। फिल्म का एक गाना "फिर चला उन राहों से फिर चला" प्रभावित करती है। यह गीत उस समय की स्थिति को दर्शाती नजर आती और थोड़ा भावुक होने का मौका देती है। इसके लिए कुणाल वर्मा, पायल देव और जुबिन नौटियाल प्रसंशा के पात्र हैं।

फिल्म में कुछ नया नहीं है जो आपकी यादों में रह जाये। फिर भी फिल्म को एक बार देखने का रिस्क उठाया जा सकता है।

✍️✍️ सूर्याकांत शर्मा ✍️✍️

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