बदले की आग में जलते मिर्जापुर 2 में खौफ की कमी क्लाइमेक्स में छोड़े गए हैं अगले पार्ट के संकेत - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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शनिवार, 24 अक्तूबर 2020

बदले की आग में जलते मिर्जापुर 2 में खौफ की कमी क्लाइमेक्स में छोड़े गए हैं अगले पार्ट के संकेत

 2018 में आई वेबसीरीज मिर्ज़ापुर जो लोगों के बीच खूब चर्चित रही थी। अब उसका दूसरा सीजन मिर्जापुर 2 अमेज़न प्राइम वीडियो पे 23 अक्टूबर को रिलीज हो गई। इसका  इंतजार लोगों को काफी वक्त से था।


Mirjapur 2

इस सीजन की कहानी पिछले सीजन में जहाँ छोड़ी गई थी। बबलू पंडित(विक्रांत मैसी) और स्वीटी गुप्ता (श्रिया  पिलगांवकर) की मौत का बदला लेने के लिए गुड्डू पंडित  उतावला है और बदले की आग में जल रहा है। उसका साथ देती है। गजगामिनी गुप्ता(स्वेता त्रिपाठी) मुन्ना और गुड्ड दोनों को गद्दी चाहिए। मुन्ना(दिव्येंदु शर्मा) रतीशंकर शुक्ला के बेटे शरद शुक्ला(अंजुम शर्मा) से हाथ मिला लेता है। और शरद भी गुडू से अपने पिता का बदला लेने के लिए मुन्ना से मिल जाता है। लेकिन वो त्रिपाठीयों से मिर्जापुर हासिल कर अपने पिता का अधूरा ख्वाब भी पूरा करना चाहता है। उधर मुन्ना गुडु को मारकर अपनी काबिलियत सिद्ध करना चाहता है। कालीन भैया(पंकज त्रिपाठी) राजनेता बनने के उम्मीद में मुन्ना की शादी यूपी के मुख्यमंत्री के विधवा बेटी माधुरी(ईशा तलवार) से मुन्ना की शादी चुनावी लाभ देने के बहाने करवा देते हैं। जो कुछ वक़्त के बाद खुद मुख्यमंत्री का पद हासिल कर लेती है। उधर गुड्ड भैया लाला के साथ अफीम का धंधा शुरू करते हैं। और वो पूरे सीजन में घायल हैं और गोलू उनका साथ देती दिखती हैं। गुडु के पिता रमाकांत पंडित(राजेश तैलंग) मिर्जापुर को अपराध और गुंडागर्दी से बचाने और बहू स्वीटी और बेटे बबलू को न्याय दिलाने की कोशिश करते नजर आते हैं। उधर कालीन भैया की पत्नी बिना त्रिपाठी(रसिका दुग्गल) गुडु और गोलू का साथ कालीन भैया और मुन्ना से चुपके देती है और वो अपने ससुर सत्यानन्द त्रिपाठी(कुलभूषण खरबंदा) के शोषण का विरोध करती नजर आयी हैं। अंत में गद्दी की गुड्डू पंडित, कालीन भैया के बेटे मुन्ना और शरद शुक्ला के बीच छिड़ी लड़ाई में किसकी जीत होगी इसके लिए आपको मिर्जापुर 2 देखना होगा। इस सीजन में कहानी में फैलाव भी किया गया पिछले सीजन में जहाँ मिर्जापुर से जौनपुर के बीच जंग चल रही थी। इस सीजन में बिहार भी शामिल है।


रिव्यु

इस सीजन में रोमांच भरने की पूरी कोशिश की गई है। लेकिन शुरुआत के कुछ एपिसोड थोड़े बोर करते दिखते हैं। और कहानी थोड़ी धीमी गति से बढ़ती दिखती है। लेकिन बाद में ये अपना रंग हासिल करती है। पुराने सीजन की तरह ही इसमें भी धांसू डायलॉग हैं। जो प्रभावित और कहानी में समाये हुए दिखते हैं। इस बार महिलाओं के किरदार को सिर्फ सेक्स और ग्लैमर के रूप में नहीं बल्कि उन्हें एक योद्धा के रूप में गढ़ा गया है जो इस बार खास है। इसके लिए पुनीत और विनीत कृष्णा तारीफ के पात्र हैं। लेकिन एपिसोड की की ज्यादा लंबाई कहानी के रोमांच पे थोड़ा दखल पैदा करती है। और थोड़ा बोर भी करती है। अभिनय में पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया का किरदार अच्छा रहा है। उन्होंने अपने बाहुबली और शांत व्यक्तित्व को अच्छे से निखारा है। उनके अलावा अली फजल भी बदले की आग में जल रहे भाई और पति के किरदार में मजेदार लगे हैं। मुन्ना भैया ने फिर अपने संवाद और अदाकारी से दिल जीता है। इस सीजन की खास बात महिला किरदारों की आक्रमकता रही है। जिसे स्वेता त्रिपाठी, हर्षिता गौर काफी हद तक संभालती दिखी हैं। रसिका दुग्गल समेत सभी कलाकारों ने अपना काम अच्छे से किया। लेकिन इस बार गोलियों का खौफ पिछले सीजन के मुकाबले थोड़ा कम मसूस होता है। नए कैरेक्टर उम्मीद के मुताबिक प्रभावित करते नहीं दिखते हैं। क्लाइमेक्स में थोड़ा आप कंफ्यूज हो सकते हैं। और क्लाइमैक्स दर्शकों को पूरी तरह सन्तुष्ट करने में सफल होती नहीं दिखती है। क्योंकि एक तरफ जहां गद्दी को गुडु हासिल करता है। वहीं कालीन भैया का जिंदा बचना और शरद शुक्ला का अपने पिता का मिर्जापुर की गद्दी अपने कब्जे में लेने का अधूरा ख्वाब पूरा नहीं करना। ये सारे अधूरे निशान मिर्जापुर के एक और पार्ट आने की तरफ इशारा करते है। गुरमीत सिंह और मिहिर देसाई के डायरेक्शन और बैग्राउंड म्यूजिक बिल्कुल कहानी की थीम के मुताबिक हैं। जो आपको उस महौल में ढ़ाले रखती है।


जिन्हें क्राइम,खून-खराबा और गालियों से नफरत है। वो इसे नजरअंदाज कर सकते हैं। बाकी ये एक फुल मनोरंजक वेबसेरीज़ है जिसमें रोमांच का तड़का लगा हुआ है।

✍️✍️ सूर्याकांत शर्मा ✍️✍️


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