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रविवार, 24 जनवरी 2021

फिल्म "द व्हाइट टाइगर" में प्रियंका चोपड़ा जैसे कलाकारों के अलावा इस नए कलाकार ने किया जबरदस्त अभिनय

 प्रियंका चोपड़ा काफी वक्त से फिल्म इंडस्ट्री से दूर थी। दर्शक उनके वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब उनकी एक फिल्म “द व्हाइट टाइगर” बीते शुक्रवार को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। जिसमें एक गरीब ड्राइवर के अर्स से फर्स तक पहुंचने की कहानी को दिखाया गया है।यह फिल्म अरविंद अडिगा के लिखी उपन्यास “द व्हाइट टाइगर” पर आधारित है।


Priyanka chopra and Rajkumar rao

 सबसे पहले जानते हैं व्हाइट टाइगर है क्या? व्हाइट टाइगर सफेद रंग का दिखने वाला बाघ है। जो कई पीढ़ियों में एक बार जन्म लेता है, इसका वैज्ञानिक नाम “पैंथरा टाइग्रिस” है। इस बाघ का जन्म आंतरिक प्रजनन(एक ही वंश के नर और मादा से पैदा होने वाले बच्चे) के द्वारा होता है। इसलिए व्हाइट टाइगर और भी दुर्लभ प्रजाति हो जाता है।

कहानी: इसकी कहानी एक बलराम (आदर्श गौरव) की है। जो काफी गरीबी में पला बढ़ा है। जो पढ़ने में बहुत अच्छा है, लेकिन उसकी पढ़ाई इसी गरीबी के पांव तले दब जाती है। और वह अपना पेट पालने के लिए हलवाई की दुकान पर काम करने लगता है। लेकिन वह हार नहीं मानता उसके सपने को मजबूत बनाने में उसके पिता का भी योगदान रहता है, वह अपनी पिता के दर्द भरी मौत को भुला नहीं पता है। जिसके बाद वो कोयला व्यपारी(महेश मांजरेकर) के बेटे अशोक(राजकुमार राव) से प्रभावित होता है। और उनका ड्राइवर बनने के लिए दिल्ली की ओर रवाना होता है। वहाँ वो अपने आप को फर्स्ट ड्राइवर कहलाने के लिए पहले वाले ड्राइवर जो मुसलमान रहता है,उसकी मज़हब का राज मालिक को बताकर उस ड्राइवर को निकलवा देता है। जिसके बाद वो फर्स्ट ड्राइवर के रूप में स्थापित हो जाता है। उसे लगता है, कि अब उसकी जिंदगी बदल जाएगी।कहानी में जाति और गरीबों पे तानाशाही को भी दिखाया गया है जब एक रात पिंकी (प्रियंका चोपड़ा) की गाड़ी से एक बच्चे का मौत हो जाती है और सारा इल्जाम बलराम हलवाई पर लगा दिया जाता है,जिसके बाद वो अपनी अमीर कैसे बनता है इस राज को जानने के लिए आपको फिल्म को एक बार अपने नजरों से गुजारना होगा।


Priyanka Chopra,Rajkumar Rao

रिव्यु : जैसा कि यह फिल्म एक उपन्यास पे आधारित है। उपन्यास पे फिल्मों को बनाना इतना आसान नहीं रहता। क्योंकि उस उपन्यास से लोग पहले ही वाकिफ़ होते हैं ये भी देखा गया है कि जब भी कोई  विदेशी डायरेक्टर या राइटर की समझ भारत को लेकर उतना पारदर्शी नहीं रहती जितना कि एक भारतीय मूल के निर्माता,निर्देशक या राइटर की होती है। इसका कारण यह है कि यह भारत की संस्कृति रहन-सहन को जिये और देखे होते हैं। लेकिन फिर भी अमेरिकी मूल के डायरेक्टर रामिन बहरानी ने इसे बहुत अच्छे से निखारने की पुरजोर कोशिश की है। डायरेक्शन से उन्होंने बताया है कि फ़िल्म में एक छोटे बिंदु का भी कितना अहम योगदान होता है फिल्म या कहानी को कहने के लिए। लेकिन कई दफ़ा इस फिल्म में से एक भारतीय अहसास कहीं दब सा जाता है। लेकिन इस कमी को आदर्श गौरव अपने अभिनय से खत्म करते नजर आते हैं। आदर्श गौरव का अभिनय उनके किरदार के प्रतिकूल रहा है और उन्होंने फिर से इंडस्ट्री को बता दिया कि सफल फिल्मों की गायरेन्टी सिर्फ नामी चेहरे नहीं हो सकते। काफी वक्त के बाद आई प्रियंका चोपड़ा अपनी अभिनय से फिर एक बार दिल जीत लेती हैं। राजकुमार राव ने भी अपने किरदार में ढलने की सम्भव कोशिश की है और महेश मांजरेकर की तो शानदार अभिनय रहता ही है। फिल्म में कुछ खामियां भी हैं जैसे कि आदर्श गौरव की धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना क्योंकि पढ़ाई छूटने के बाद कोई ऐसा सीन नहीं है जहाँ उन्होंने पढ़ाई या अंग्रेजी सीखने की कोशिश या अंग्रेजी माहौल को जिया हो। जो थोड़ा आश्चर्य व्यक्त करता है। इसके अलावा यह फ़िल्म एक बार जरूर देखने योग्य है।


फिल्म:  द व्हाइट टाइगर

कलाकार:  राजकुमार राव, प्रियंका चोपड़ा, आदर्श गौरव, महेश मांजरेकर,नलनीश नील,विजय मौर्या, स्वरूप संपत,कमलेश गिल,तृप्ति खामकर और वेदांत सिन्हा

रेटिंग:  3.5 स्टार्स

डायरेक्टर: रामिन बहरानी

स्टोरी: अरविंद अडिगा 

ओटीटी प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स

✍️ सूर्याकांत शर्मा

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