सैन्य जीवन के संघर्ष को दिखाती वेब सीरीज"जीत की जिद" - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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सोमवार, 25 जनवरी 2021

सैन्य जीवन के संघर्ष को दिखाती वेब सीरीज"जीत की जिद"

 ज़ी 5 पर आयी वेब सीरीज "जीत की जिद" एक वास्तविक कहानी है। जो कारगिल युद्ध के नायक और सैन्य मेडल से सम्मानित दीपेंद्र सिंह सेंगर के सैन्य और व्यक्तिगत संघर्ष पे आधारित है, दीपेेंद्र सिंह सेेंगर की 1987 से 2010 तक की सफर को इस वेब सीरीज में दिखाया गया है। इसमें उनके दृढ़ संकल्प और मजबूत इच्छा शक्ति से भी आपको रूबरू होने का मौका मिलेगा है। 


Jeet Ki Zid

वेब सीरीज: जीत की जिद
कलाकार: अमित साध,अमृता पूरी,सुशांत सिंह,अली गोनी,गगन रंधावा,मृणाल कुलकर्णी,परितोष संद,दिवाकर ध्यानी
लेखक: सिद्धार्थ मिश्रा
निर्देशक: विशाल मंगलोरकर                                               रेटिंग: ★★★★

ओटीटी प्लेटफॉर्म: जी 5


कहानी: कहानी 1999 जम्मू कश्मीर से शुरू होती है जब दीपेंद्र सिंह सेंगर(अमित साध) कुछ सैनिकों के साथ कुछ आतंकवादियों को खत्म करने के लिए जाते हैं। फिर कहानी उनके अतीत में चली जाती है, और दीपेंद्र अपने माँ और भाई के साथ कश्मीर घूमने जाता है वहाँ उन्हें आतंकवादीयों द्वारा पकड़ लिया जाता है, और फिर आतंकियों द्वारा दीप के भाई को मार दिया जाता है। जिसके बाद अपने भाई के बदला लेने के लिए आर्मी जॉइन करने का फैसला करता है। उसके बाद वो आईएमए देहरादून से अपनी फौज के कैरियर की शुरुआत होती है। जिसके बाद दीप अपनी ट्रेनिंग इतनी शिद्दत से करता है कि वह स्पेशल फोर्स(SF) जहाँ सेलेक्शन रेट 2 प्रतिशत है।



उसकी कड़ी ट्रेनिंग पूरा कर वह स्पेशल फोर्स का मेजर बन जाता है, फिर एक बार कारगिल कि जंग के दौरान उसके पेट में 5 गोलियां लग जाती हैं और कुछ गोलियां उसे भेद कर पार भी हो जाती है। जिसके बाद उसके चार से पाँच बार ऑपरेशन की जाती है। और डॉक्टर का कहना होता है कि वो अब जिंदगी में दोबारा नहीं चल सकेगा। फिर किस तरह दीप अपनी पत्नी जया(अमृता पूरी) और कर्नल रंजीत चौधरी(सुशांत सिंह) की मदद से अपनी जिंदगी में पहले की ही तरह उठ खड़ा और मानसिक रूप से मजबूत होता है, इस ऊर्जावान पल को जानने के लिए ये वेब सीरीज देखनी होगी। 



ये वेब सीरीज अन्य सैन्य फिल्मों से थोड़ी अलग है। इसमें एक जवान की शुरू से आखिर तक के संघर्ष को बखूबी दिखाया गया है। जिसमें दीपेंद्र सिंह सेंगर के किरदार को अमित साध ने क्या खूब निभाया है, उन्होंने पूरी तरह से एक वास्तविक सैनिक का आभास कराने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। उनके हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह से एक-एक सीन से मिलता दिखाई देता है, अमृता पूरी ने भी एक पत्नी की जिम्मेदारी वाले किरदार को बहुत अच्छे से निभाती हुई दिखी है। कर्नल रंजीत चौधरी के किरदार में सुशांत सिंह परिपक्व लगें हैं। उनके अभिनय का प्रदर्शन आखरी के कुछ एपिसोड में और दमदार रहा है। सुशांत पर एक कड़े ट्रेनर का लुक काफी जंचा है। बाकी कलाकारों ने भी अच्छे प्रदर्शन किए हैं।



 इस वेब सीरीज को अगर फिल्म के रूप में निर्मित किया जाता तो यह और इंटरेस्टिंग हो सकता था। कहानी में थोड़ा खिंचाव भी दिखता है, इसकी एक वजह फिल्मों का नया रूप वेब सीरीज भी है, वेब सीरीज को थोड़ा भटकाने का काम इसका बार-बार अनावश्यक वर्तमान और अतीत में जाना  सिद्धार्थ मिश्रा की लिखावट थोड़ी और सुंदर हो सकती थी। विशाल मंगलोरकर का डायरेक्शन उतना आकर्षक नहीं रहा है जितना उनसे अपेछा की जाती है फिल्म में सैन्य दृश्यों के दरम्यान बैकग्राउंड कैरेक्टर को थोड़ा और सहज होने की भी आवश्यकता थी। जिससे पूरा फील मिल पाता फिर भी यह एक ऊर्जावान, प्रेरणास्रोत वेब सीरीज है। जिसमें एक फौजी के जीवन को बहुत ही गहराई से दर्शाया गया है।



वेब सीरीज से सीख : कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाये उसमें अपने मनोबल को गिरने न दें, मुश्किल वक्त में परिवारीक सहयोग की बहुुुत जरूरत होती है। ईमानदार और उसे पूरा करने के लिए जिद्द भी जरूरी है। कभी-कभी जीवन मेंं किसी का सहारा लेना भी हमें निर्बल बनानेे का कारण बन जाता है, इसलिए हमें आत्म निर्भर बने की जरूरत है।

✍️सूर्याकांत शर्मा







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