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रविवार, 21 फ़रवरी 2021

पहली औरत जिसे आजाद भारत में मिलेगी फाँसी !

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला जेल में बंद एक कैदी जो आजाद भारत में फाँसी की सजा पाने वाली पहली महिला हो सकती है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति दोनों ने उनकी दया याचिका को ख़ारिज कर दी हैं। अब जेल प्रशासन ने फाँसी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। शबनम ने अपनी प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के 7 लोगों की हत्या कर दी थी, घटना 14 अप्रैल 2008 को हुई थी।










शबनम है कौन, और उसकी अपराध क्या है? 
अमरोहा जिले के बावन खेरी गाँव की रहने वाली शबनम दों विषयों में MA हैं. पढ़ाई पूरी होने के बाद शबनम गाँव के ही प्राथमिक स्कूल में पढ़ाती थी. शबनम के घर में ही लकड़ी के कटाई का वर्कशॉप था, वहाँ काम करने वाले सलीम को शबनम पसंद करने लगी. सलीम 8वी पास है. और फिर शबनम ने अपने पिता से कहा कि मैं सलीम से प्यार करती हूँ, मुझे उससे ही शादी करनी है. तो उसके पिता ने इस बात से इंकार कर दिया, उन्होंने कहा कि वो एक मामूली सा काम करने वाला है मैं तुम्हारी शादी किसी ऐसे सख्स से नहीं करवा सकता तुम्हारी शादी एक अच्छे और अमीर लड़के से करवाऊंगा, मैं किसी भी कीमत पर तुम्हारा ये रिश्ता नहीं मान सकता. और फिर क्या था शबनम ने ये बात सलीम को  कही फिर दोनों ने मिलकर योजना बनाया, सलीम ने शबनम से कहा अगर हमदोनों मिलकर तुम्हारे परिवार वालों को जान से मार देते है तो हम एक भी हो जायंगे और सारी प्रोपटी भी हमारी हो जाएगी और फिर हम सारी जिंदगी ऐश करंगे. शबनम ने उसकी बातें मान ली. अपने योजना के अनुसार उस दौरान सलीम ने एक मेडिकल दुकान से नींद की दवा खरीद के शबनम को दे दिया और फिर रात के वक्त्त शबनम ने दूध में वो नींद की दवा मिलाकर अपने पूरे परिवार में से 6 लोगों को दे दिया और उन 7 लोगों में से 1 उसका भतीजा था जो कि 11 महीनें का था उसने उसे वो नशीली दूध नहीं दी, उस दौरान सलीम वहाँ आ पहुँचा जब उसके घर वालें बेहोशी के नींद में थे तब सलीम और शबनम ने उन सातों लोगों की हत्या कर दी. शबनम ने एक एक कर सबका सर पकड़ा और सलीम ने सबके गले कुल्हाड़ी से काट दिए और उन सातों में से एक बच्चा जो की 11 महीनें का था उस बच्चें को ये दोनों ने बेरहमी से गले दबा कर मार डाला. फिर सलीम अपने घर चला गया और रात के तकरीबन 12:30 बजे के आसपास शबनम जोर जोर से चिल्लाने लगी, कि उसके घरवालों का किसी ने हत्या कर दिया।  








पुलिस को कैसे हुआ शबनम पर शक?  
शुरुआत में शबनम पीड़ित लग रही थी और बहुत ही ज्यादा रो रही थी. ऐसे में पुलिस को हिम्मत नहीं हुई कि वह उसपे दबाव डालकर कोई सवाल पूछे. शबनम ने अपने चचेरे भाई पर घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया. उसने कहा मेरे घरवालें और चाचा के परिवार के बीच प्रोपटी को लेकर के बहुत दिनों से मतभेद चल रही थी। लेकिन कुछ बेसिक सवालों के दौरान शबनम बार-बार फस रही थी. उसी दौरान शबनम पर पुलिस को शक हुआ. और उस बीच सलीम फरार था. सलीम के पकड़े जाने के बाद, उसने यानि कि सलीम ने खुद अपनी जुर्म कबूल कर ली. और फिर शबनम पर दबाव देकर पूछा गया तो उसने भी हत्या की बात स्वीकार कर ली, कि उसने ही अपने परिवार के सभी लोगों की जान ली हैं। सलीम के घर से खून से लगे कपड़े, कुल्हाड़ी बरामद किए गए। इस मामले में 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को सजाए मौत देते हुए इलाहबाद कोर्ट के द्वारा फैसले को बरकरार रखा। बता दे कि सलीम इस वक्त्त आगरा जेल में बंद है. पवन जल्लाद जिन्होंने निर्भया के दोषियों को फाँसी पर लटकाया था, मथुरा जेल में वो दे सकते है शबनम को फाँसी. पूरे देश में केवल एक मथुरा ही है जहाँ औरतों को फाँसी देनी की व्यवस्था हैं। साथ ही आपको ये भी बता दे कि शबनम ने एक बेटे को जेल के अंदर ही जन्म दिया था. वर्तमान में शबनम का बेटा 13 साल का है. शबमन के बेटे ने भी राष्टपति और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से गुहार लगा चुका है ताकि उसकी माँ को माफीनामा मिल जाए. उसने गुहार लगाते वक्त्त कहा मेरे सर से माँ का साया हट जाएगा कृप्या मेरी माँ की दया याचिका स्वीकार कर ले. और दूसरा विकल्प है प्रेमी सलीम, साथ ही दूसरी तरफ शबनम और सलीम के वकील शमशेर के मुताबिक इनदोनों की फाइलें साथ ही चल रही हैं. अदालत ने दोनों को साथ ही सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी दोनों की फाइलें साथ ही चली। राष्ट्रपति ने दोनों की दया याचिका साथ ही खारिज की थी, और दोंनो को एक ही जुर्म में एक साथ ही, फाँसी की सजा सुनायी गयी थी।

✍️पूजा गुप्ता✍️

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