मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लाहिड़ी का निधन, मंगलवार को अस्पताल में कराया गया था भर्ती - Bihari karezza - Khabre Bihar Ki

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बुधवार, 16 फ़रवरी 2022

मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लाहिड़ी का निधन, मंगलवार को अस्पताल में कराया गया था भर्ती

 

बॉलीवुड के म्यूजिक डायरेक्टर बप्पी लहरी का मंगलवार रात 11 बजे 69 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मुंबई के जुहू स्थित क्रिटी केयर हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। म्यूजिक इंडस्ट्री में बप्पी लहरी को डिस्को किंग कहा जाता था। उनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी था। बप्पी लहरी अपने म्यूजिक के साथ साथ सोना पहनने के अंदाज को लेकर भी जाने जाते थे ।










अस्पताल के निदेशक डॉ. दीपक नमजोशी ने कहा, ‘‘लाहिरी करीब एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे और उन्हें सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दी गयी थी, लेकिन उनकी सेहत मंगलवार को बिगड़ गई और उनके परिवार ने एक डॉक्टर को घर बुलाया. उन्हें अस्पताल लाया गया. उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई दिक्कतें थी. उनकी देर रात ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया) के कारण मौत हो गई.’’बप्पी दा इंडस्ट्री में अपनी अलग आवाज और संगीत के लिए पहचाने जाते थे। उन्हें 1975 में आई फिल्मजख्मी से पहचान मिली थी। पॉप म्यूजिक को भारत लाने का श्रेय बप्पी लहरी को ही जाता है। बप्पी दा ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में दावेदारी पेश की थी। नामांकन के दौरान सिंगर बताया था कि उनके पास कुल 752 ग्राम सोना और 4.62 किलो चांदी है।


बप्‍पी लाहिड़ी जिनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है का जन्‍म 27 नवंबर 1952 को जलपैगुड़ी पश्चिम बंगाल में हुआ था।इनके पिता का नाम अपरेश लाहिड़ी तथा मां का नाम बन्‍सारी लाहिड़ी है।


बप्‍पी लाहिड़ी ने मात्र तीन वर्ष की आयु में ही तबला बजाना शुरू कर दिया था जिसे बाद में उनके पिता के द्वारा और भी गुण सिखाये गये। बॉलीवुड को रॉक और डिस्को से रू-ब-रू कराकर पूरे देश को अपनी धुनों पर थिरकाने वाले मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लाहिड़ी ने कई बड़ी छोटी फिल्‍मों में काम किया है। बप्पी दा ने 80 के दशक में बालीवुड को यादगार गानों की सौगात दे कर अपनी पहचान बनाई। 













महज 17 साल की उम्र से ही बप्पी संगीतकार बनना चाहते थे और उनकी प्रेरणा बने एसडी बर्मन। बप्पी टीनएज में एसडी बर्मन के गानों को सुना करते और उन्हें रियाज किया करते थे। 

जिस दौर में लोग रोमांटिक संगीत सुनना पसंद करते थे उस वक्त बप्पी ने बॉलीवुड में 'डिस्को डांस' को इंट्रोड्यूस करवाया। उन्हें अपना पहला अवसर एक बंगाली फ़िल्म, दादू (1972) और पहली हिंदी फ़िल्म नन्हा शिकारी (1973) में मिला जिसके लिए उन्होंने संगीत दिया था। जिस फ़िल्म ने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया, वह ताहिर हुसैन की हिंदी फ़िल्म ज़ख़्मी (1975) थी, जिसके लिए उन्होंने संगीत की रचना की और पार्श्व गायक के रूप में दोगुनी कमाई की। 

 

इस फिल्म ने उन्हें प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर पहुंचाया और हिंदी फिल्म उद्योग में एक नए युग को आगे लाया। इसके बाद तो वे फिल्‍म दर फिल्‍म बुलंदियों को छूते गये और बॉलीवुड में अपना नाम बड़े कलाकार के रूप में प्रतिष्ठित किया।




बप्‍पी लाहिड़ी प्रसिध्‍द गायक होने के साथ म्‍यूजिक डायरेक्‍टर, अभिनेता एवं रिकॉर्ड प्रोड्यूसर भी थे।

स्वीटी शर्मा.......✍️

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