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मंगलवार, 10 मई 2022

बालश्रम का नासूर


भारत दशकों  से बाल श्रम का नासूर झेल रहा है।यह कहने  में कोई झिझक नहीं है।जिस बच्चे पर हमारा भविष्य निर्भर है आज वही बच्चा कठिन परिस्थितियों के दलदल में फंसा हुआ है । यूं कहें तो वह  मजबूरी का चादर ओढ़े हुए हैं । बच्चे अपने सुनहरे सपने की जगह झाड़ू पोछा से किसी घर रेस्टोरेंट  चमकाने में लगे हुए हैं , तो कहीं अपने शरीर से ज्यादा काम करते हुए नजर आ रहे हैं जिस बच्चे को भगवान का रूप कहा जाता है उस बच्चे से काम करवाते समय मजदूरी करवाने में गुरेज नहीं होता है।



सरकार बस लंबी-लंबी बात करती है । बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करती है, पर नतीजा वही ढाक के तीन पात निकलता है । इतनी जागरुकता के बाद भी भारत में बाल मजदूरी के खात्मे के आसार दूर-दूर तक नहीं दिखते है । हालांकि आपको यह बता दें कि बाल श्रम केवल भारत तक ही सीमित नहीं या एक वैश्विक घटना है । एक आकड़ा  के अनुसार यह पता चला है कि दुनिया भर में लगभग 21.8 करोड़ बच्चे काम करते हैं ,जिनमें से अधिकांश  को सही से न उचित शिक्षा सही पोषण नहीं मिल पा रहा है। जिससे उन्हें कई सारे शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है ।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक है  विश्व में  21  करोड़ 80 लाख बाल श्रमिक हैं ।जबकि अकेले भारत में इनकी संख्या एक करोड़ 26 लाख  से ऊपर है । दुखद बात है कि वह मजबूरी वश खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं । उनमें से आधे से अधिक बाल श्रम का सबसे खराब स्वरूप है , जैसे - हानिकारक वातावरण गुलामी या मजबूर श्रम के अनुरूप मादक पदार्थों की तस्करी और वेश्यावृत्ति सहित अवैध गतिविधि संघर्ष में शामिल होते हैं ।

जो उर्म उनकी पढ़ाई और खेलकूद की है वह काम करने में चला जाता है । गौरतलब है कि हमारे देश में कानून की कमी नहीं है लेकिन विडंबना है कि उसका जब पालन करने की बात होती है तो हमारा सरकार, कानून उस समय चुप्पी साध लेता है।यही वजह है कि भारत में बाल श्रम मुख्य समस्याओं में से एक है । इसे खत्म करने के लिए हमें आवाज उठाना होगा ,लोगों को जागरूक करना होगा ,कानून को सही तरीके से पालन करना होगा तो ऐसे में हमारे देश के भविष्य को ऐसी स्थिति नहीं देखने को मिलेगी । बाल मजदूरी पूरी तरह से खत्म हो जाएगा । हमारे देश में बाल श्रमिकों की संख्या बढ़ती जा रही है ।इसका प्रमुख कारण गरीबी है , गरीब लोग अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए बच्चों को मजदूरी करने के लिए भेजते हैं मजबूरीवश। अगर इस पर हम  ध्यान दें तो आधी गलती उन लोगो की है जो 2 से अधिक बच्चे पैदा करते हैं ।और अभी हमारा समाज इतना जागरुक नहीं हुआ है।ग्रामीण इलाके में ज्यादातर देखने को मिल जाते हैं । वहां लोगों में जनसंख्या को लेकर जागरूकता की बहुत कमी है । जिस कारण वहां के लोगों को अपने बच्चों को बालश्रम के लिए भेजना पड़ जाता है ।क्योंकि वह इतने बच्चों का भरण पोषण करने में सफल नहीं हो पाते हैं । इस कारण इनके बच्चे विद्यालय जाने की जगह काम करने जाते हैं।

गौरतलब है कि अधिकांश बच्चे माता-पिता ना होने के कारण बचपन में मजदूरी कर अपना पेट पालने में लग जाते हैं । मौजूदा समय में गरीब बच्चे सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं ।बाल मजदूरी इंसानियत के लिए अभिशाप है । देश के विकास में बड़ा बाधक भी है ।

स्वस्थ बालक राष्ट्र का अभिमान है।आज का बालक कल का भविष्य है । लेकिन आज वही कल के भविष्यों को चाय की दुकान , ढाबों तथा उन क्षेत्रों में कार्य करते हुए हैं उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता का दुरुपयोग किया जाता है तो हम शर्मसार हो जाते हैं।अगर हम भारतीय संविधान की बात करें तो उद्योग कल कर खाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक काम करने वाले 5 से 14 वर्ष के उम्र के बच्चों को बालश्रमिक कहा जाता है ।मौलिक अधिकारों मैं शोषण और अन्याय के विरुद्ध अनुच्छेद 23 और 24 को रखा गया।अनुच्छेद 23 खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है।अनुच्छेद 24 के अनुसार 14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या फिर खादान  में काम करने के लिए और और ना ही किसी अन्य खतरनाक काम के लिए नियुक्त होगा ।

जबकि धारा 45 के अंतर्गत देश के सभी राज्यों को 14 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देना अनिवार्य किया गया ।फिर भी इतने बड़े कानूनों के होने के रहते हुए बच्चों से दिन - रात काम करवाया जा रहा है ।

बदहाल, बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए कई संगठन आदि प्रयास करें ताकि कई मासूम बच्चों की जिंदगी को बचाया जा सके । उनके भविष्य से कोई खिलवाड़ ना हो ।2025 तक बालश्रम समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । हमें सरकार से भी उम्मीद है कि यह हमारे देश से पूरी तरह समाप्त हो जाए ताकि बच्चों के भविष्य तथा मानवधिकारों का हनन न हो।

नाम - कुमारी ऐश्वर्या

छात्रा , M.A मास कम्युनिकेशन,जर्नलिज्म

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखण्ड


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